देखने वाले कुछ दरबारी भी विद्यमान थे। वीर केशरी ’अमरसिंह राठौर’ ने शाहजहां के सामने भरे दरबार में सलावत खां का सिर उड़ा दिया था और बादशाह डर के मारे भाग कर स्वयं जनानख़ाने में प्राण बचाने के निमित्त जा घुसा था। वंश परम्परा से तो शिवाजी की नाड़ियों में भी पवित्र राजपूती रक्त दौरा कर रहा था। कहते हैं कि औरंगजेब ने यह तमाशा देखकर अनदेखा कर दिया, सिवाय मुस्कुराने के अन्य कोई बात मुंह से न निकाली और दरबार बर्खास्त हो गया। उस
देखने वाले कुछ दरबारी भी विद्यमान थे। वीर केशरी ’अमरसिंह राठौर’ ने शाहजहां के सामने भरे दरबार में सलावत खां का सिर उड़ा दिया था और बादशाह डर के मारे भाग कर स्वयं जनानख़ाने में प्राण बचाने के निमित्त जा घुसा था। वंश परम्परा से तो शिवाजी की नाड़ियों में भी पवित्र राजपूती रक्त दौरा कर रहा था। कहते हैं कि औरंगजेब ने यह तमाशा देखकर अनदेखा कर दिया, सिवाय मुस्कुराने के अन्य कोई बात मुंह से न निकाली और दरबार बर्खास्त हो गया। उस