छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

दिन से शिवाजी कभी दरबार में नहीं आये और औरंगजेब को

छत्रपति शिवाजी 85

सलाम किया। हां ! दूतों की मार्फत मेल मिलाप की बातें करते रहे। औरंगजेब दिल ही दिल में अपनी चालों पर खूब प्रसन्न हो रहा था। जिस समय शिवाजी अत्यन्त क्षुब्ध और क्रुद्व होकर दरबार में गरज रहे थे उस समय औरंगजेब ने यह विचार कर हंस दिया कि यह अब भी ’शेर की कन्दरा में आकर गुर्राता है’ क्या उसे यह मालूम नहीं कि जीवन की घड़िया समाप्त हो गई हैं और अब वीरता दिखलाने


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दिन से शिवाजी कभी दरबार में नहीं आये और औरंगजेब को

छत्रपति शिवाजी 85

सलाम किया। हां ! दूतों की मार्फत मेल मिलाप की बातें करते रहे। औरंगजेब दिल ही दिल में अपनी चालों पर खूब प्रसन्न हो रहा था। जिस समय शिवाजी अत्यन्त क्षुब्ध और क्रुद्व होकर दरबार में गरज रहे थे उस समय औरंगजेब ने यह विचार कर हंस दिया कि यह अब भी ’शेर की कन्दरा में आकर गुर्राता है’ क्या उसे यह मालूम नहीं कि जीवन की घड़िया समाप्त हो गई हैं और अब वीरता दिखलाने


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