के टोकरे भेजने शुरू कर दिये ऐसी टोकारियों में जिनमें मनुष्य बड़े आराम से छिप कर बैठ सकता था मिठाई भर भर कर मन्दिरों और मस्जिदों को भेजी जाने लगीं।
एक दिन अपने एक साथी को जो सूरत शक्ल और मुखडे़ की बनावट में शिवाजी से बहुत कुछ मिलता जुलता था अपनी सोने की अंगूठी पहना कर अपनी चारपाई पर लिटा
86 छत्रपति शिवाजी
दिया और आप एक टोकरे में (जो मिठाई से भरी थी) बैठे और दूसरी में अपने पुत्र सम्भाजी को (जो संग ही था) बिठाकर शहर
के टोकरे भेजने शुरू कर दिये ऐसी टोकारियों में जिनमें मनुष्य बड़े आराम से छिप कर बैठ सकता था मिठाई भर भर कर मन्दिरों और मस्जिदों को भेजी जाने लगीं।
एक दिन अपने एक साथी को जो सूरत शक्ल और मुखडे़ की बनावट में शिवाजी से बहुत कुछ मिलता जुलता था अपनी सोने की अंगूठी पहना कर अपनी चारपाई पर लिटा
86 छत्रपति शिवाजी
दिया और आप एक टोकरे में (जो मिठाई से भरी थी) बैठे और दूसरी में अपने पुत्र सम्भाजी को (जो संग ही था) बिठाकर शहर