और एक रात शिवाजी की जान बड़े संकट में पड़ी रही। शिवाजी को यह चिन्ता हुई कि ईश्वर न करे, यह सम्पूर्ण परिश्रम बेकार ही जाय और दिल्ली के बजाय काशी में एक दुष्ट मुसलमान के हाथ मारा जाऊं। दिल में विचारा कि ऐसा काम करना चाहिए जिससे या तो इधर या उधर। यदि पहरेदार कुछ लालच में जा जाये तो काम बन जाये। यह विचार कुछ लालच में जा जाये तो काम बन जाये। यह विचार कर तुरन्त फौजदार के सामने जा खड़े हुए और चुपके से कहा कि मैं शिवाजी हूं एक ओर
और एक रात शिवाजी की जान बड़े संकट में पड़ी रही। शिवाजी को यह चिन्ता हुई कि ईश्वर न करे, यह सम्पूर्ण परिश्रम बेकार ही जाय और दिल्ली के बजाय काशी में एक दुष्ट मुसलमान के हाथ मारा जाऊं। दिल में विचारा कि ऐसा काम करना चाहिए जिससे या तो इधर या उधर। यदि पहरेदार कुछ लालच में जा जाये तो काम बन जाये। यह विचार कुछ लालच में जा जाये तो काम बन जाये। यह विचार कर तुरन्त फौजदार के सामने जा खड़े हुए और चुपके से कहा कि मैं शिवाजी हूं एक ओर