छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

मैं हूं और दूसरी और बहुमूल्य ये दो हीरे हैं। यदि हीरे लेने की इच्छा है तो मुझे छोड़ दो अन्यथा मैं तो तैयार ही हूं, जो चाहे सो कर, जीता पकड़ ले या सिर काट ले और औरंगजेब के पास भेज दे परन्तु यह ख्याल रहे कि इस अवस्था में हीरे तेरे

छत्रपति शिवाजी 87

हाथ न लगेंगे। शिवाजी ने सोचा कि यदि यहां एक रात और रहा तो प्रातःकाल तक शाही सेना अपने कर्मचारियों के साथ पहुंच जायेगी और फिर जान से हाथ धोना पडे़गा। यदि यह चाल चल गई तो अच्छा,


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मैं हूं और दूसरी और बहुमूल्य ये दो हीरे हैं। यदि हीरे लेने की इच्छा है तो मुझे छोड़ दो अन्यथा मैं तो तैयार ही हूं, जो चाहे सो कर, जीता पकड़ ले या सिर काट ले और औरंगजेब के पास भेज दे परन्तु यह ख्याल रहे कि इस अवस्था में हीरे तेरे

छत्रपति शिवाजी 87

हाथ न लगेंगे। शिवाजी ने सोचा कि यदि यहां एक रात और रहा तो प्रातःकाल तक शाही सेना अपने कर्मचारियों के साथ पहुंच जायेगी और फिर जान से हाथ धोना पडे़गा। यदि यह चाल चल गई तो अच्छा,


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