छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

वरना मरना तो है ही। शिवाजी ने अपनी जान हथेली पर रख कर जो चाल चली वह पूरी उतर गई। मुसलमान फौजदार ने लालच में आकर हीरे ले लिये और शिवाजी को छोड़ दिया। बस फिर क्या था शिवाजी अत्यन्त फुर्ती के साथ रात कूच करते हुए काशी आ पहुंचे और फिर काशी से बिहार पटना और चांदा के रास्ते दक्षिण आ पहुंचे।

उधर दिल्ली का वृत्तान्त सुनिये। एक गुप्तचर ने औरंगजेब को खबर दी कि शिवाजी भाग गया। सम्राट् ने कोतवाल से उत्तर मांगा, कोतवाल ने लिखा कि


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वरना मरना तो है ही। शिवाजी ने अपनी जान हथेली पर रख कर जो चाल चली वह पूरी उतर गई। मुसलमान फौजदार ने लालच में आकर हीरे ले लिये और शिवाजी को छोड़ दिया। बस फिर क्या था शिवाजी अत्यन्त फुर्ती के साथ रात कूच करते हुए काशी आ पहुंचे और फिर काशी से बिहार पटना और चांदा के रास्ते दक्षिण आ पहुंचे।

उधर दिल्ली का वृत्तान्त सुनिये। एक गुप्तचर ने औरंगजेब को खबर दी कि शिवाजी भाग गया। सम्राट् ने कोतवाल से उत्तर मांगा, कोतवाल ने लिखा कि


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