अच्छी तरह से जांच की गई तो भेद खुल गयाथ् तत्काल सब सूबेदारों, हाकिमों, सेनापतियों तथा फौजदारों के नाम आज्ञा पत्र भेजे गये कि शिवाजी जहां भी मिले तुरन्त पकड़ कर दरबार में उपस्थित किया जाये। अत्यन्त शीघ्रता से दूत चारों तरफ भेजे गये परन्तु पिंजड़े से निकला हुआ शेर फिर हाथ न आया और औरंगजेब हाथ मलता रह गया।
शिवाजी तो किसी प्रकार अपनी जान बचाकर निकल भागे परन्तु बेचारे रामसिंह पर शाही आपत्ति आ पड़ी। रामसिंह को अपनी प्रतिज्ञा
अच्छी तरह से जांच की गई तो भेद खुल गयाथ् तत्काल सब सूबेदारों, हाकिमों, सेनापतियों तथा फौजदारों के नाम आज्ञा पत्र भेजे गये कि शिवाजी जहां भी मिले तुरन्त पकड़ कर दरबार में उपस्थित किया जाये। अत्यन्त शीघ्रता से दूत चारों तरफ भेजे गये परन्तु पिंजड़े से निकला हुआ शेर फिर हाथ न आया और औरंगजेब हाथ मलता रह गया।
शिवाजी तो किसी प्रकार अपनी जान बचाकर निकल भागे परन्तु बेचारे रामसिंह पर शाही आपत्ति आ पड़ी। रामसिंह को अपनी प्रतिज्ञा