पूर्ति का दण्ड भुगतना पड़ा। उधर शिवाजी के पिता का बीजापुर की लड़ाई से लौटते समय
88 छत्रपति शिवाजी
रास्ते में देहान्त हो गया। यदि शिवाजी भी औरंगजेब के हाथ से न निकलते तो अवश्य मारे जाते और औरंगजेब की चाल पूर्ण रूप से सफल होती परन्तु शिवाजी के भाग्य में कुछ और ही होनहार था। जयसिंह शिवाजी की सेवा करते करते मरे, जिसकी मौत से औरंगजेब को अपने विचारों के अनुसार एक बलवान् शत्रु से छुटकारा मिला। परन्तु शिवाजी ने औरंगजेब के हाथ
पूर्ति का दण्ड भुगतना पड़ा। उधर शिवाजी के पिता का बीजापुर की लड़ाई से लौटते समय
88 छत्रपति शिवाजी
रास्ते में देहान्त हो गया। यदि शिवाजी भी औरंगजेब के हाथ से न निकलते तो अवश्य मारे जाते और औरंगजेब की चाल पूर्ण रूप से सफल होती परन्तु शिवाजी के भाग्य में कुछ और ही होनहार था। जयसिंह शिवाजी की सेवा करते करते मरे, जिसकी मौत से औरंगजेब को अपने विचारों के अनुसार एक बलवान् शत्रु से छुटकारा मिला। परन्तु शिवाजी ने औरंगजेब के हाथ