गम्भीरता पूर्वक किया था और इस विषय से सम्बन्धित अनेक स्वदेशी एवं विदेशी लेखकों के ग्रन्थों को पढ़ा था। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशक में उनकी महापुरूषों के विशद जीवनचरित लिखे। योगिराज कृष्ण, छत्रपति शिवाजी, सम्राट् अशोक, महर्षि दयानन्द तथा अपने सहपाठी एंव वैदिक विद्वान पं. गुरूदत्त विद्यार्थी के प्रामाणिक जीवनचरित लिखने के साथ साथ उन्होंने इटली को स्वाधीनता दिलाने वाले ग्वीसेप मैजिनी तथा वीर गैरीवाल्डी के जीवनचरित भी
गम्भीरता पूर्वक किया था और इस विषय से सम्बन्धित अनेक स्वदेशी एवं विदेशी लेखकों के ग्रन्थों को पढ़ा था। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशक में उनकी महापुरूषों के विशद जीवनचरित लिखे। योगिराज कृष्ण, छत्रपति शिवाजी, सम्राट् अशोक, महर्षि दयानन्द तथा अपने सहपाठी एंव वैदिक विद्वान पं. गुरूदत्त विद्यार्थी के प्रामाणिक जीवनचरित लिखने के साथ साथ उन्होंने इटली को स्वाधीनता दिलाने वाले ग्वीसेप मैजिनी तथा वीर गैरीवाल्डी के जीवनचरित भी