लिखे। इन दो विदेशी महापुरूषों ने लालाजी को अत्याधिक प्रभावित किया था।
जिस समय वे मराठा वीर छत्रपति शिवाजी का जीवनचरित लिख रहे थे उस समय तक इस महापुरूष के बारे में अधिक गहरा ऐतिहासिक अनुसंधान नहीं हुआ था। खाफी
सम्पादकीय 5
खां जैसे एकाध मुसलमान इतिहासकार द्वारा लिखे गये वृत्तान्त के अतिरिक्त कुछ विदेशी लेखकों के ग्रन्थ इस विषय पर उपलब्ध थे।शायद मराठी में कुछ सामग्री रही होगी। लालाजी ने सभी उपलब्ध सूत्रों को समन्वित
लिखे। इन दो विदेशी महापुरूषों ने लालाजी को अत्याधिक प्रभावित किया था।
जिस समय वे मराठा वीर छत्रपति शिवाजी का जीवनचरित लिख रहे थे उस समय तक इस महापुरूष के बारे में अधिक गहरा ऐतिहासिक अनुसंधान नहीं हुआ था। खाफी
सम्पादकीय 5
खां जैसे एकाध मुसलमान इतिहासकार द्वारा लिखे गये वृत्तान्त के अतिरिक्त कुछ विदेशी लेखकों के ग्रन्थ इस विषय पर उपलब्ध थे।शायद मराठी में कुछ सामग्री रही होगी। लालाजी ने सभी उपलब्ध सूत्रों को समन्वित