जिम्मेदारी मेरे ऊपर टाल दी। देखें मुझे कैसे सफलता प्राप्त होती है। तत्काल अपने महल में चली गई और चांदी के एक थाल में दीपक जलाकर ले आई। इतने में तानाजी भी आ पहुंचां माता जी ने थाली तानाजी के शिर के ऊपर घुमा कर खुले मस्तक हो आर्शीवाद दिया, बेटा! चिरन्जीव रहो, तानाजी ने पगड़ी उतार कर माताजी के पैरों पर रख दी और बोला- जो आज्ञा हो उसको पूरा करने के लिए सेवक उपस्थित है। जीजाबाई ने कहा कि ऐ मेरे सरदार! बुढ़ापे में एक यही अभिलाषा रह गई है कि सिंहगढ़ को विजय किया जाए,
जिम्मेदारी मेरे ऊपर टाल दी। देखें मुझे कैसे सफलता प्राप्त होती है। तत्काल अपने महल में चली गई और चांदी के एक थाल में दीपक जलाकर ले आई। इतने में तानाजी भी आ पहुंचां माता जी ने थाली तानाजी के शिर के ऊपर घुमा कर खुले मस्तक हो आर्शीवाद दिया, बेटा! चिरन्जीव रहो, तानाजी ने पगड़ी उतार कर माताजी के पैरों पर रख दी और बोला- जो आज्ञा हो उसको पूरा करने के लिए सेवक उपस्थित है। जीजाबाई ने कहा कि ऐ मेरे सरदार! बुढ़ापे में एक यही अभिलाषा रह गई है कि सिंहगढ़ को विजय किया जाए,