के लहंगे पहिन कर घर का रास्ता लो। बस इतना कहना था कि मरहठों के नेत्रों में खून उतर आया। सब के सब आगे बढ़ने लगे। अन्त को तानाजी ने 500 आदमी चुन लिया और सबों ने एक हो ऊपर चढ़ना आरम्भ कर दिया यहां तक कि रस्सी टूट गई,
102 छत्रपति शिवाजी
और सब के सब पृथ्वी पर गिर पड़े। जब तानाजी को यह समाचार मिला तो उन्हें अत्यन्त खेद हुआ और कहने लगे कि केवल रस्सी ही नहीं टूटी प्रत्युत सच पूछो तो हमारे जीवन की लड़ी समाप्त हो गई। चाचा शेलरजी को सम्बोधन कर कहने लगे।
के लहंगे पहिन कर घर का रास्ता लो। बस इतना कहना था कि मरहठों के नेत्रों में खून उतर आया। सब के सब आगे बढ़ने लगे। अन्त को तानाजी ने 500 आदमी चुन लिया और सबों ने एक हो ऊपर चढ़ना आरम्भ कर दिया यहां तक कि रस्सी टूट गई,
102 छत्रपति शिवाजी
और सब के सब पृथ्वी पर गिर पड़े। जब तानाजी को यह समाचार मिला तो उन्हें अत्यन्त खेद हुआ और कहने लगे कि केवल रस्सी ही नहीं टूटी प्रत्युत सच पूछो तो हमारे जीवन की लड़ी समाप्त हो गई। चाचा शेलरजी को सम्बोधन कर कहने लगे।