एक इतिहासकार लेखक ने इस प्रकार लिखा है कि तानाजी के साथ ऊपर 300 मनुष्य चढे़ और शेष किसी कारण नहीं चढ़ सके। तानाजी अपने साथियों को लेकर आगे बढ़ा ओर जो मिल गया उसको काटता गया। किले की तमाम सेना में हलच लमच गई। मित्र व शत्रु को पहचानना कठिन हो गया। दोनों ओर की तलवारें म्यान से खींच ली गई। देखते ही देखते पृथ्वी पर रक्त की धारा बह चली।
उधर किले के भीतर उदयभानु मस्त होकर सो रहा था। जब उसे इस प्रकार की चढ़ाई का समाचार मिला
एक इतिहासकार लेखक ने इस प्रकार लिखा है कि तानाजी के साथ ऊपर 300 मनुष्य चढे़ और शेष किसी कारण नहीं चढ़ सके। तानाजी अपने साथियों को लेकर आगे बढ़ा ओर जो मिल गया उसको काटता गया। किले की तमाम सेना में हलच लमच गई। मित्र व शत्रु को पहचानना कठिन हो गया। दोनों ओर की तलवारें म्यान से खींच ली गई। देखते ही देखते पृथ्वी पर रक्त की धारा बह चली।
उधर किले के भीतर उदयभानु मस्त होकर सो रहा था। जब उसे इस प्रकार की चढ़ाई का समाचार मिला