छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

और कन्धे पर रस्सी तथा कम्बल डाल कर जंगल में घास काटो और बनिये की दूकान पर बेचो। ये शस्त्र तेरे लिए व्यर्थ हैं इनको फंेक दो।’

तानाजी-अरे मूर्ख ! क्यों अपने को बाप दादा के नाम पर बट्टा लगाता है; जा, और खेत से सन काट ले आ। उसके बोरे बनाकर अपनी औरत को दे और कह कि बेच कर कुछ धान खरीद लावे और धान के छिलके की रोटी बनावे और चावलों को बाजार में बेच आये। जाओ, तलवार रख दो क्यांेकि तुम्हें इसे पकड़ने तक की बुद्वि नहीं है।

इस प्रकार


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और कन्धे पर रस्सी तथा कम्बल डाल कर जंगल में घास काटो और बनिये की दूकान पर बेचो। ये शस्त्र तेरे लिए व्यर्थ हैं इनको फंेक दो।’

तानाजी-अरे मूर्ख ! क्यों अपने को बाप दादा के नाम पर बट्टा लगाता है; जा, और खेत से सन काट ले आ। उसके बोरे बनाकर अपनी औरत को दे और कह कि बेच कर कुछ धान खरीद लावे और धान के छिलके की रोटी बनावे और चावलों को बाजार में बेच आये। जाओ, तलवार रख दो क्यांेकि तुम्हें इसे पकड़ने तक की बुद्वि नहीं है।

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