की वंशपरम्परा का वर्णन करके दोनों वीर सामने हुए। पठान उन्मत्त हाथी पर सवार था और मराठा वीर तानाजी घोड़े पर था। सब से पहला वार पठान ने बड़े जोर से किया जो पत्थर को चीरता हुआ पार निकल गया परन्तु वह भी खाली गया। पठान ने फिर दूसरी बार वार किया परन्तु वह भी खाली गया। अन्त में तानाजी घोड़े से उछला और हाथी के समीप आकर उसकी सूंड पर ऐसा वार किया और हाथी के समीप आकर उसकी सूंड पर ऐसा वार किया कि हाथी घायल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा। साथ
की वंशपरम्परा का वर्णन करके दोनों वीर सामने हुए। पठान उन्मत्त हाथी पर सवार था और मराठा वीर तानाजी घोड़े पर था। सब से पहला वार पठान ने बड़े जोर से किया जो पत्थर को चीरता हुआ पार निकल गया परन्तु वह भी खाली गया। पठान ने फिर दूसरी बार वार किया परन्तु वह भी खाली गया। अन्त में तानाजी घोड़े से उछला और हाथी के समीप आकर उसकी सूंड पर ऐसा वार किया और हाथी के समीप आकर उसकी सूंड पर ऐसा वार किया कि हाथी घायल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा। साथ