हुए और पकड़े गये। इस बड़ी विजय का फल यह हुआ कि मुग़ल सेना, ’सह्यरा’
छत्रपति शिवाजी 107
को छोड़कर औरंगाबाद की ओर हट गई। इस वर्षाऋतु में शिवाजी छोटी छोटी लड़ाइयां लड़ते रहे ताकि सम्पूर्ण दक्षिण प्रान्त में एक राज्य हो जाय। पुर्तगाल वालों से भी कई बार थोड़ी भिड़न्त हुई जिसमें किसी पक्ष की अधिक हानि नहीं हुई।
अंग्रेज भी इस अवसर पर प्रतिज्ञा विषयक पत्र-व्यवहार करते रहे। उधर मुग़ल सम्राट् औरंगजेब ने जब यह समाचार सुना कि इखलासखां
हुए और पकड़े गये। इस बड़ी विजय का फल यह हुआ कि मुग़ल सेना, ’सह्यरा’
छत्रपति शिवाजी 107
को छोड़कर औरंगाबाद की ओर हट गई। इस वर्षाऋतु में शिवाजी छोटी छोटी लड़ाइयां लड़ते रहे ताकि सम्पूर्ण दक्षिण प्रान्त में एक राज्य हो जाय। पुर्तगाल वालों से भी कई बार थोड़ी भिड़न्त हुई जिसमें किसी पक्ष की अधिक हानि नहीं हुई।
अंग्रेज भी इस अवसर पर प्रतिज्ञा विषयक पत्र-व्यवहार करते रहे। उधर मुग़ल सम्राट् औरंगजेब ने जब यह समाचार सुना कि इखलासखां