हार गया तो महावतखां और खानमुअज्जम को दक्षिण का सूबेदार नियत कर दिया। खानजहां ने यह उचित समझा कि मरहठों पर हमले न किये जायं। किन्तु घाटों और मार्गाें को रोक कर उन्हें तंग किया जाय। अतएव उसने ’बहादुरगढ़’ नाम का किला बनवाया परन्तु उसे यह कब मालूम था कि मरहठे घाटों और दर्रो (घाटी) से बड़ी सुगमता पूर्वक आ जा सकते हैं और वे इस देश की ईंट-ईंट से परिचित हैं। खानजहां जब इस प्रकार के काम में लगा था तो शिवाजी अवसर पाकर ’गोलकुण्डा’
हार गया तो महावतखां और खानमुअज्जम को दक्षिण का सूबेदार नियत कर दिया। खानजहां ने यह उचित समझा कि मरहठों पर हमले न किये जायं। किन्तु घाटों और मार्गाें को रोक कर उन्हें तंग किया जाय। अतएव उसने ’बहादुरगढ़’ नाम का किला बनवाया परन्तु उसे यह कब मालूम था कि मरहठे घाटों और दर्रो (घाटी) से बड़ी सुगमता पूर्वक आ जा सकते हैं और वे इस देश की ईंट-ईंट से परिचित हैं। खानजहां जब इस प्रकार के काम में लगा था तो शिवाजी अवसर पाकर ’गोलकुण्डा’