में मिला लिया जाये। इसके लिए चाहे छोटे छोटे राज्यों को नष्ट करना पड़े तो भी कोई हर्ज नहीं परन्तु दक्षिणी प्रान्त अवश्य हाथ आवे। अगर औरंगजेब से सुलह करके बीजापुर और गोलकुण्डा ठीक रहते तो इसमें सन्देह न था कि सम्पूर्ण दक्षिण नाम मात्र से ही औरंगजेब की राजधानी में शामिल हो जाता अथवा औरंगजेब ही सच्चे हृदय से बीजापुर और गोलकुण्डा से मेल करके शिवाजी को अपने बस में करने का यत्न करता तो भी शायद सफलता मिली होती। परन्तु उसे तो यह
में मिला लिया जाये। इसके लिए चाहे छोटे छोटे राज्यों को नष्ट करना पड़े तो भी कोई हर्ज नहीं परन्तु दक्षिणी प्रान्त अवश्य हाथ आवे। अगर औरंगजेब से सुलह करके बीजापुर और गोलकुण्डा ठीक रहते तो इसमें सन्देह न था कि सम्पूर्ण दक्षिण नाम मात्र से ही औरंगजेब की राजधानी में शामिल हो जाता अथवा औरंगजेब ही सच्चे हृदय से बीजापुर और गोलकुण्डा से मेल करके शिवाजी को अपने बस में करने का यत्न करता तो भी शायद सफलता मिली होती। परन्तु उसे तो यह