इच्छा रही कि ये तीनों शक्तियां क्षीण हो जायें और दक्षिण का सारा प्रदेश मुग़लराज्य में शामिल हो जाये। औरंगजेब इन शक्तियों को एक दूसरे से लड़ाने में ही अपनी सफलता देखता था, जिसका फल यह हुआ कि किसी
छत्रपति शिवाजी 111
को भी उसकी बात का विश्वास न रहा। ये तीन राजा एक तरफ औरंगजेब से लड़ते थे दूसरी तरफ आपस में भी झगड़ते रहते थे। इस झगड़े में यदि चार शक्तियों में से किसी ने सफलता प्राप्त की तो वे शिवाजी ही थे। सन् 1673 ई. में
इच्छा रही कि ये तीनों शक्तियां क्षीण हो जायें और दक्षिण का सारा प्रदेश मुग़लराज्य में शामिल हो जाये। औरंगजेब इन शक्तियों को एक दूसरे से लड़ाने में ही अपनी सफलता देखता था, जिसका फल यह हुआ कि किसी
छत्रपति शिवाजी 111
को भी उसकी बात का विश्वास न रहा। ये तीन राजा एक तरफ औरंगजेब से लड़ते थे दूसरी तरफ आपस में भी झगड़ते रहते थे। इस झगड़े में यदि चार शक्तियों में से किसी ने सफलता प्राप्त की तो वे शिवाजी ही थे। सन् 1673 ई. में