बल और सारा अधिकार अन्यत्र था। शिवाजी ने अपने लिए यह अवसर अच्छा समझा और कर्नाटक के धावे की तैयारी शुरू कर दी।
यहां पर एक बात याद रखने योग्य है कि शिवाजी का एक छोटा भाई और था, जिस का नाम ’दुनकाजी’ था और वह अपने बाप की जागीर का मालिक बन बैठा था! शाहजी के जो विश्वासपात्र अधिकारी थे उनमें से ’रघुनाथ नारायण’ उसके पास रही करता था। रघुनाथ नारायण और ’दुनकाजी’ में परस्पर अनबन हो गई। कुछ समय तक तो वह गोलकुण्डा में अबूहुसेन के
बल और सारा अधिकार अन्यत्र था। शिवाजी ने अपने लिए यह अवसर अच्छा समझा और कर्नाटक के धावे की तैयारी शुरू कर दी।
यहां पर एक बात याद रखने योग्य है कि शिवाजी का एक छोटा भाई और था, जिस का नाम ’दुनकाजी’ था और वह अपने बाप की जागीर का मालिक बन बैठा था! शाहजी के जो विश्वासपात्र अधिकारी थे उनमें से ’रघुनाथ नारायण’ उसके पास रही करता था। रघुनाथ नारायण और ’दुनकाजी’ में परस्पर अनबन हो गई। कुछ समय तक तो वह गोलकुण्डा में अबूहुसेन के