शिवाजी की आगवानी के वास्ते आया और बड़े आदर सत्कार के साथ उनको अपनी राजधानी में ले आया। अन्त में शिवाजी और गोलकुण्डा के बादशाह में यह प्रतिज्ञा हुई कि कर्नाटक में जितनी ’शाहजी’ की जागीर है उसके अतिरिक्त जितनी भूमि शिवाजी के हाथ आये उसे गोलकुण्डा के बीच बराबर बांट दी जाय और यदि बीजापुर के दरबार से अब्दुलकरीम को निकाल कर उसके स्थान पर मदनपन्त के भाई को नियत कर दिया जाय तो उसको भी उसमें से हिस्सा दिया जाय। यदि विचार पूर्वक
शिवाजी की आगवानी के वास्ते आया और बड़े आदर सत्कार के साथ उनको अपनी राजधानी में ले आया। अन्त में शिवाजी और गोलकुण्डा के बादशाह में यह प्रतिज्ञा हुई कि कर्नाटक में जितनी ’शाहजी’ की जागीर है उसके अतिरिक्त जितनी भूमि शिवाजी के हाथ आये उसे गोलकुण्डा के बीच बराबर बांट दी जाय और यदि बीजापुर के दरबार से अब्दुलकरीम को निकाल कर उसके स्थान पर मदनपन्त के भाई को नियत कर दिया जाय तो उसको भी उसमें से हिस्सा दिया जाय। यदि विचार पूर्वक