देखा जाय तो स्पष्ट ज्ञात होता है कि नियत कर दिया जाय तो उसको भी उसमें से ज्ञात होता है कि कर्नाटक वास्तव में बीजापुर का था। अपनी जागीर के अलावा न कुछ शिवाजी का था और न कुछ गोलकुण्डाधीश का । यह भी परस्पर प्रतिज्ञाएं की गई कि दूसरों के मुकाबले में शिवाजी और गोलकुण्डा अधीश एक दूसरे की सहायता करेंगे। इस प्रकार मुसलमानी गोलकुण्डा दरबार को दम दिलासा देकर शिवाजी मार्च मास में कृष्णा नदी के पार उतर गये। कुछ दिन तो तीर्थ यात्रा
देखा जाय तो स्पष्ट ज्ञात होता है कि नियत कर दिया जाय तो उसको भी उसमें से ज्ञात होता है कि कर्नाटक वास्तव में बीजापुर का था। अपनी जागीर के अलावा न कुछ शिवाजी का था और न कुछ गोलकुण्डाधीश का । यह भी परस्पर प्रतिज्ञाएं की गई कि दूसरों के मुकाबले में शिवाजी और गोलकुण्डा अधीश एक दूसरे की सहायता करेंगे। इस प्रकार मुसलमानी गोलकुण्डा दरबार को दम दिलासा देकर शिवाजी मार्च मास में कृष्णा नदी के पार उतर गये। कुछ दिन तो तीर्थ यात्रा