में बीते। तत्पश्चात् कर्नाटक पर चढ़ाई की। मई के प्रथम सप्ताह में मद्रास में जा निकले और गुंजी प्रान्त में पहंुचे जो उस समय बीजापुर के अधीन
छत्रपति शिवाजी 113
था। अमीर खां के पुत्रों ने जो उस राज्य के शासक थे स्वंय ही अपनी इलाका शिवाजी के हवाले कर दिया। शिवाजी ने वहां महाराष्ट्र का शासन और वही प्रबन्ध आदि जारी रखकर ’रवानी’ को हवालदार नियत कर दिया आगे बढ़ चले। बीजापुर के एक अधिकारी शेरखां ने पांच हजार सिपाहियों से उसका
में बीते। तत्पश्चात् कर्नाटक पर चढ़ाई की। मई के प्रथम सप्ताह में मद्रास में जा निकले और गुंजी प्रान्त में पहंुचे जो उस समय बीजापुर के अधीन
छत्रपति शिवाजी 113
था। अमीर खां के पुत्रों ने जो उस राज्य के शासक थे स्वंय ही अपनी इलाका शिवाजी के हवाले कर दिया। शिवाजी ने वहां महाराष्ट्र का शासन और वही प्रबन्ध आदि जारी रखकर ’रवानी’ को हवालदार नियत कर दिया आगे बढ़ चले। बीजापुर के एक अधिकारी शेरखां ने पांच हजार सिपाहियों से उसका