मुकाबला किया परन्तु परास्त होकर कैद हो गया। इस अवसर पर सेना के बाकी हिस्सों ने (जिनको शिवाजी पीछे छोड़ गये थे) ’दिलौर’ पर धावा कर दिया। यह घेरा 5 दिसम्बर तक रहा अन्त में किला हाथ आ गया। इधर शिवाजी ने पने भाई ’दुनकाजी’ से ’तरवाड़ी’ के स्थान पर मुलाकात की और यह अभिलाषा प्रकट की कि दोनों भाई बड़े उत्साह से मिल जायें।
शिवाजी अपने पिता शाहजी की जायदाद से आधा भाग मांगते थे परन्तु ’दुनकाजी’ नहीं देता था। निर्णय कुछ भी न हो सका,
मुकाबला किया परन्तु परास्त होकर कैद हो गया। इस अवसर पर सेना के बाकी हिस्सों ने (जिनको शिवाजी पीछे छोड़ गये थे) ’दिलौर’ पर धावा कर दिया। यह घेरा 5 दिसम्बर तक रहा अन्त में किला हाथ आ गया। इधर शिवाजी ने पने भाई ’दुनकाजी’ से ’तरवाड़ी’ के स्थान पर मुलाकात की और यह अभिलाषा प्रकट की कि दोनों भाई बड़े उत्साह से मिल जायें।
शिवाजी अपने पिता शाहजी की जायदाद से आधा भाग मांगते थे परन्तु ’दुनकाजी’ नहीं देता था। निर्णय कुछ भी न हो सका,