दुनकाजी तंजोर किले को लौट गया। शिवाजी की सेना विजय पर विजय प्राप्त करती गई। शिवाजी बराबर अपने भाई को कहते गये कि बहुत अच्छा हो यदि सन्धि कर ली जाये क्योंकि मैं भमि की इच्छा से यहां नहीं आया हूं परन्तु तो भी अपने पिता की जायदाद छोड़ना नहीं चाहता। इस अवसर पर ’दुनकाजी’ ने शिवाजी की एक न सुनी, फलस्वरूप शिवाजी ने शाहजी के सम्पूर्ण प्रान्तों पर अधिकार जमा लिया।
इधर शिवाजी विजय करने पर तुले हुए थे, उधर औरंगजेब ने सुना कि ’खानजहां’
दुनकाजी तंजोर किले को लौट गया। शिवाजी की सेना विजय पर विजय प्राप्त करती गई। शिवाजी बराबर अपने भाई को कहते गये कि बहुत अच्छा हो यदि सन्धि कर ली जाये क्योंकि मैं भमि की इच्छा से यहां नहीं आया हूं परन्तु तो भी अपने पिता की जायदाद छोड़ना नहीं चाहता। इस अवसर पर ’दुनकाजी’ ने शिवाजी की एक न सुनी, फलस्वरूप शिवाजी ने शाहजी के सम्पूर्ण प्रान्तों पर अधिकार जमा लिया।
इधर शिवाजी विजय करने पर तुले हुए थे, उधर औरंगजेब ने सुना कि ’खानजहां’