अत्यन्त साहस के साथ शिवाजी ने अपने प्राणों को संकट में डालकर चढ़ाई कर दी और शत्रु की सेना को दिखला दिया कि आवश्यकता पड़ने पर शिवाजी किस प्रकार से तलवार चला सकता है । बस फिर क्या था मरहठे की तलवार बिजली के समान चमकने लगी और विकट युद्व छिड़ गया। मरहठे अपने सरदार को लेकर मुग़ल सेना के बीच होकर निकल गये परन्तु अभी दूर नहीं गये थे कि मुग़ल सेना ने एकत्रित होकर राजा किशनसिंह (जयसिंह का पोता) की आज्ञानुसार धावा कर दिया यहां तक
अत्यन्त साहस के साथ शिवाजी ने अपने प्राणों को संकट में डालकर चढ़ाई कर दी और शत्रु की सेना को दिखला दिया कि आवश्यकता पड़ने पर शिवाजी किस प्रकार से तलवार चला सकता है । बस फिर क्या था मरहठे की तलवार बिजली के समान चमकने लगी और विकट युद्व छिड़ गया। मरहठे अपने सरदार को लेकर मुग़ल सेना के बीच होकर निकल गये परन्तु अभी दूर नहीं गये थे कि मुग़ल सेना ने एकत्रित होकर राजा किशनसिंह (जयसिंह का पोता) की आज्ञानुसार धावा कर दिया यहां तक