छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

राजत्व काल में उत्पन्न होकर आर्य जाति के गौरव को जीवित कर देना शिवाजी का ही काम था। वे अपने नौकरों और सम्बन्धियों से प्रेमपूर्वक बर्ताव करते थे। शिवाजी की मृत्यु के कुछ दिन पहले यह समाचार मिला था कि ’’दुनकाजी हतोत्साह होकर सम्पूर्ण कार्य छोड़ बैठा है और उसने वैराग्य धारण कर लिया है।’’ ऐसा समाचार पाकर शिवाजी ने एक पत्र लिखा था जिसका विषय इस प्रकार था-

प्यारे बन्धु-

बहुत दिन हुए तुम्हारा पत्र नहीं मिला, चित्त उदास है


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राजत्व काल में उत्पन्न होकर आर्य जाति के गौरव को जीवित कर देना शिवाजी का ही काम था। वे अपने नौकरों और सम्बन्धियों से प्रेमपूर्वक बर्ताव करते थे। शिवाजी की मृत्यु के कुछ दिन पहले यह समाचार मिला था कि ’’दुनकाजी हतोत्साह होकर सम्पूर्ण कार्य छोड़ बैठा है और उसने वैराग्य धारण कर लिया है।’’ ऐसा समाचार पाकर शिवाजी ने एक पत्र लिखा था जिसका विषय इस प्रकार था-

प्यारे बन्धु-

बहुत दिन हुए तुम्हारा पत्र नहीं मिला, चित्त उदास है


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