छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

शिवाजी अपने धर्म पर अत्यन्त दृढ़ रहते थे। रामायण और महाभारत आदि ऐतिहासिक तथा धार्मिक पुस्तकों के अवलोकन व श्रवण से उनको अधिक प्रेम था। कभी कभी मौका पाकर युद्व-स्थल से ही कथा श्रवण करने को चले जाते थे। जहां कहीं भी धर्म-चर्चा और मत-मतान्तरों पर शास्त्रार्थ का समाचार पाते थे वहां अवश्य पहुंचा करते थे। पूजा और नित्य कर्म में कभी फर्क नहीं पड़ता था।

पिछले पृष्ठों में शिवाजी का राज्य, शासन और उनकी वीरता और दिलेरी का वर्णन


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शिवाजी अपने धर्म पर अत्यन्त दृढ़ रहते थे। रामायण और महाभारत आदि ऐतिहासिक तथा धार्मिक पुस्तकों के अवलोकन व श्रवण से उनको अधिक प्रेम था। कभी कभी मौका पाकर युद्व-स्थल से ही कथा श्रवण करने को चले जाते थे। जहां कहीं भी धर्म-चर्चा और मत-मतान्तरों पर शास्त्रार्थ का समाचार पाते थे वहां अवश्य पहुंचा करते थे। पूजा और नित्य कर्म में कभी फर्क नहीं पड़ता था।

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