जिनका नाम ’अष्टप्रधान’ था आठ विभागों के उत्तम-उत्तम कार्यकत्र्ता उसके सभासद थे-
(1) पेशवाजी- राजमन्त्री थे और राजा के बाद रियासत के सब से पहले पद पर नियुक्त थे। इनका दर्जा दरबार में राजसिंहासन के नीचे दाहिने ओर अव्वल जगह पर रहता था।
(2) सेनापति- अर्थात् सिपहसालार, सेना का उत्तम ओहदेदार था और दरबार में बाई ओर दूसरे नम्बर पर बैठता था यह स्थान गवर्नमेंट आफ इण्डिया के कमाण्डर इन चीफ की जगह के समान थी।
(3) अस्त्यानपन्त कोषाध्यक्ष- जो महामन्त्री से नीचे बैठता था।
जिनका नाम ’अष्टप्रधान’ था आठ विभागों के उत्तम-उत्तम कार्यकत्र्ता उसके सभासद थे-
(1) पेशवाजी- राजमन्त्री थे और राजा के बाद रियासत के सब से पहले पद पर नियुक्त थे। इनका दर्जा दरबार में राजसिंहासन के नीचे दाहिने ओर अव्वल जगह पर रहता था।
(2) सेनापति- अर्थात् सिपहसालार, सेना का उत्तम ओहदेदार था और दरबार में बाई ओर दूसरे नम्बर पर बैठता था यह स्थान गवर्नमेंट आफ इण्डिया के कमाण्डर इन चीफ की जगह के समान थी।
(3) अस्त्यानपन्त कोषाध्यक्ष- जो महामन्त्री से नीचे बैठता था।