आदि के समय में तकाबी दी जाती और किस्तों में कर वसूल किया जाता था। दीवानी अभियोग ग्रामों की पंचायत के सुपुर्द (अधीन) रहते थे।
फौजदारी का कार्य सूबेदार किया करते थे। हिसाब किताब सर्वथा स्वच्छ और उत्तम था। वर्ष के अन्त में जांच हुआ करती थी हिसाब जोड़ लगाकर बाकी निकाली जाती थी। जो धन राज्य की तरफ निकलता था तत्काल चुका दिया जाता था।
पैदल सेना में दस सिपाहियों में एक नायक नियत था
124 छत्रपति शिवाजी
और 15 नायकों पर एक
आदि के समय में तकाबी दी जाती और किस्तों में कर वसूल किया जाता था। दीवानी अभियोग ग्रामों की पंचायत के सुपुर्द (अधीन) रहते थे।
फौजदारी का कार्य सूबेदार किया करते थे। हिसाब किताब सर्वथा स्वच्छ और उत्तम था। वर्ष के अन्त में जांच हुआ करती थी हिसाब जोड़ लगाकर बाकी निकाली जाती थी। जो धन राज्य की तरफ निकलता था तत्काल चुका दिया जाता था।
पैदल सेना में दस सिपाहियों में एक नायक नियत था
124 छत्रपति शिवाजी
और 15 नायकों पर एक