हवलदार। दो हवलदारों पर एक ’सहास्तक’ नामक अध्यक्ष तथा सात अध्यक्षों पर एक जमादार था। 10 जमादारों पर एक अधिकारी नियत था। ये अधिकारी दो प्रकार के होते थे- (1) जागीरदार (2) सतजिलेदार। एक के पास राज्य की तरफ से घोड़ा और दूसरे के पास अपना घोड़ा रहता था। प्रत्येक ऊंचे सेनाध्यक्षों के पास एक क्लर्क (लेखक) रहता था। प्रत्येक को मासिक वेतन नगद दिया जाता था। शिक्षा के लिए मन्दिरों तथा पाठशालाओं और पण्डितों के नाम जागीर रहा करती थी।
हवलदार। दो हवलदारों पर एक ’सहास्तक’ नामक अध्यक्ष तथा सात अध्यक्षों पर एक जमादार था। 10 जमादारों पर एक अधिकारी नियत था। ये अधिकारी दो प्रकार के होते थे- (1) जागीरदार (2) सतजिलेदार। एक के पास राज्य की तरफ से घोड़ा और दूसरे के पास अपना घोड़ा रहता था। प्रत्येक ऊंचे सेनाध्यक्षों के पास एक क्लर्क (लेखक) रहता था। प्रत्येक को मासिक वेतन नगद दिया जाता था। शिक्षा के लिए मन्दिरों तथा पाठशालाओं और पण्डितों के नाम जागीर रहा करती थी।