जिस समय शिवाजी का जन्म हुआ था उस समय दक्षिण में संस्कृत का प्रचार कम था परन्तु शिवाजी के उत्साह एवं पुरूषार्थ से संस्कृत का प्रचार अधिक बढ़ गया था। शिवाजी के समय में दशहरा का उत्सव बड़ी उत्तमता से मनाया जाता था। इस समय पर प्रत्येक सिपाही की सम्पत्ति की सूची बनाई जाती थी। यदि किसी में कुछ कमी हो जाती थी तो दरबार से पूरी की जाती थी। यदि किसी में कुछ कमी हो जाती थी तो दरबार से पूरी की जाती थी। परन्तु लूट-पाट का धन किसी को नहीं मिलता था,
जिस समय शिवाजी का जन्म हुआ था उस समय दक्षिण में संस्कृत का प्रचार कम था परन्तु शिवाजी के उत्साह एवं पुरूषार्थ से संस्कृत का प्रचार अधिक बढ़ गया था। शिवाजी के समय में दशहरा का उत्सव बड़ी उत्तमता से मनाया जाता था। इस समय पर प्रत्येक सिपाही की सम्पत्ति की सूची बनाई जाती थी। यदि किसी में कुछ कमी हो जाती थी तो दरबार से पूरी की जाती थी। यदि किसी में कुछ कमी हो जाती थी तो दरबार से पूरी की जाती थी। परन्तु लूट-पाट का धन किसी को नहीं मिलता था,