को छीनने वाला शहाबुद्दीन गौरी था। दिल्ली के सिंहासन पर अपना अधिकार जमाने वाला पहला मुसलमान बादशाह कुतबुद्दीन एबक था जो गुलाम वंश का था, जिस का कार्यकाल 1205 या 1206 ई. माना जा सकता है।
बारहवीं से सोलहवीं शताब्दी, अथवा यों कहें कि सम्राट् अकबर के शासन काल तक इस देश में अनेक स्वतन्त्र हिन्दू नरेश थे। भारत के मानचित्र पर हम दृष्टिपात करें तो इसमें आपको राजपुताना का विशाल क्षेत्र दिखाई देगा। मूलतः यह उतना छोटा नहीं था जितना
को छीनने वाला शहाबुद्दीन गौरी था। दिल्ली के सिंहासन पर अपना अधिकार जमाने वाला पहला मुसलमान बादशाह कुतबुद्दीन एबक था जो गुलाम वंश का था, जिस का कार्यकाल 1205 या 1206 ई. माना जा सकता है।
बारहवीं से सोलहवीं शताब्दी, अथवा यों कहें कि सम्राट् अकबर के शासन काल तक इस देश में अनेक स्वतन्त्र हिन्दू नरेश थे। भारत के मानचित्र पर हम दृष्टिपात करें तो इसमें आपको राजपुताना का विशाल क्षेत्र दिखाई देगा। मूलतः यह उतना छोटा नहीं था जितना