कालान्तर में गुरू गोविन्दसिंह और उनके अनुयायियों जैसे वीर पुरूष भारत में पैदा हुए। राजपुतों ने भी अकबर से पहले तक के काल में पूर्णतया राजनैतिक परतन्त्रता स्वीकार नहीं की थी। अकेला राजपूताना ही भारत का इतना विशाल प्रचण्ड था जिसने मुसलमानी शासन सिंहासन पर मुग़लों के शासन की स्थापना कर दी।
इधर तो दिल्ली का शासन मुगलों के अधिकार में था, उधर पंजाब में एक ऐसे देशभक्त ने जन्म लिया जिसने धर्मप्रचारकों और उपदेशकों के एक ऐसे दल
कालान्तर में गुरू गोविन्दसिंह और उनके अनुयायियों जैसे वीर पुरूष भारत में पैदा हुए। राजपुतों ने भी अकबर से पहले तक के काल में पूर्णतया राजनैतिक परतन्त्रता स्वीकार नहीं की थी। अकेला राजपूताना ही भारत का इतना विशाल प्रचण्ड था जिसने मुसलमानी शासन सिंहासन पर मुग़लों के शासन की स्थापना कर दी।
इधर तो दिल्ली का शासन मुगलों के अधिकार में था, उधर पंजाब में एक ऐसे देशभक्त ने जन्म लिया जिसने धर्मप्रचारकों और उपदेशकों के एक ऐसे दल