सेना तथा साजसामान अस्तव्यस्त थे। उसकी रानियां तथा बच्चे तीर्थ यात्रा पर निकले हुए थे। जब रामदेव राय ने सुना कि अलाउद्दीन ने राजधानी को अपनी सेना से घेर लिया है तो वह अपने साधारण नौकरों को एकत्र कर आक्रमणकारी का मुकाबला करने का विचार करने लगा, परन्तू ये लोग कब तक शत्रु सेना के सामने टिक पाते? राजा अपने बचाव के लिए एक दूसरे पहाड़ी किले में जा छिपा यह मौका पाकर युवराज अलाउद्दीन खिलजी किले में घुस कर लूटपाट करने लगा और प्रचारित
सेना तथा साजसामान अस्तव्यस्त थे। उसकी रानियां तथा बच्चे तीर्थ यात्रा पर निकले हुए थे। जब रामदेव राय ने सुना कि अलाउद्दीन ने राजधानी को अपनी सेना से घेर लिया है तो वह अपने साधारण नौकरों को एकत्र कर आक्रमणकारी का मुकाबला करने का विचार करने लगा, परन्तू ये लोग कब तक शत्रु सेना के सामने टिक पाते? राजा अपने बचाव के लिए एक दूसरे पहाड़ी किले में जा छिपा यह मौका पाकर युवराज अलाउद्दीन खिलजी किले में घुस कर लूटपाट करने लगा और प्रचारित