द्वारा बाधित की जाती है तो उनमें स्वधर्म रक्षा का जो जोश उमड़ा उसके आगे मुगल सेना और शाही तलवार भी कांप गई।
शिवाजी और गुरू गोविन्द सिंह पर लिखते समय यदि हम महाराणा प्रताप को भुला दे ंतो यह अन्याय होगा। मुगलवंश को मजा चखाने में वीर प्रताप तथा उनके वंशजों ने जो किया, उसे भुलाना कठिन है। महाराणा सांगा के राजसिंहासन पर जब प्रताप विराजमान हुए, उस समय मुगलों के अत्याचार सीमातीत स्थिति तक पहुंच गये थे। अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़
द्वारा बाधित की जाती है तो उनमें स्वधर्म रक्षा का जो जोश उमड़ा उसके आगे मुगल सेना और शाही तलवार भी कांप गई।
शिवाजी और गुरू गोविन्द सिंह पर लिखते समय यदि हम महाराणा प्रताप को भुला दे ंतो यह अन्याय होगा। मुगलवंश को मजा चखाने में वीर प्रताप तथा उनके वंशजों ने जो किया, उसे भुलाना कठिन है। महाराणा सांगा के राजसिंहासन पर जब प्रताप विराजमान हुए, उस समय मुगलों के अत्याचार सीमातीत स्थिति तक पहुंच गये थे। अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़