छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

रहने वाले महाराणा ने अपने प्यारे बच्चों को भूख से तड़पते और बिलबिलाते देखा तथापि उनके मन में मुगलों की अधीनता स्वीकार करने का विचार एक बार भी नहीं आया। उस समय के राजपुतों में फूट और विरोध पराकाष्ठा पर पहंुच चुका था। खुद महाराणा का भाई शक्तिसिंह अकबर के दरबार में एक पद स्वीकार कर चुका था और बादशाह का पक्ष लेकर महाराणा के विरूद्व तलवार उठा चुका था।

चित्तौड़ का किलाा मुगलों के अधीन था किन्तू अवशिष्ट राजपुताना पूर्ण स्वतन्त्र


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रहने वाले महाराणा ने अपने प्यारे बच्चों को भूख से तड़पते और बिलबिलाते देखा तथापि उनके मन में मुगलों की अधीनता स्वीकार करने का विचार एक बार भी नहीं आया। उस समय के राजपुतों में फूट और विरोध पराकाष्ठा पर पहंुच चुका था। खुद महाराणा का भाई शक्तिसिंह अकबर के दरबार में एक पद स्वीकार कर चुका था और बादशाह का पक्ष लेकर महाराणा के विरूद्व तलवार उठा चुका था।

चित्तौड़ का किलाा मुगलों के अधीन था किन्तू अवशिष्ट राजपुताना पूर्ण स्वतन्त्र


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