रह गया। हमारे बाद अंदमान आकर हमारे पहले जो मुक्त हुए थे, ऐसे कतिपय राजनीतिक बंदियों ने अपने-अपने अनुभवों को प्रसिद्व किया- ऐसा हमने देखा। अन्यत्र भी वर्ष अथवा छह महीनों के लिए जो कारागृह में बंद थे, ऐसे लोगों ने भी उनके अनुभवों तथा उनकी यातनाओं की कहानी को समयःसमय
पर प्रसिद्व किया और हमने उसे पढ़ लिया। परंतु ऐसे आत्म-स्मृति कथन में आत्म-श्लाघा की जो गंध अनिवार्य रूप में आ जाती है, वह हमारे मन को पुनः-पुनः सकुचाया करती
रह गया। हमारे बाद अंदमान आकर हमारे पहले जो मुक्त हुए थे, ऐसे कतिपय राजनीतिक बंदियों ने अपने-अपने अनुभवों को प्रसिद्व किया- ऐसा हमने देखा। अन्यत्र भी वर्ष अथवा छह महीनों के लिए जो कारागृह में बंद थे, ऐसे लोगों ने भी उनके अनुभवों तथा उनकी यातनाओं की कहानी को समयःसमय
पर प्रसिद्व किया और हमने उसे पढ़ लिया। परंतु ऐसे आत्म-स्मृति कथन में आत्म-श्लाघा की जो गंध अनिवार्य रूप में आ जाती है, वह हमारे मन को पुनः-पुनः सकुचाया करती