मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

मैं शूर पुरूष हूं, और इसीलिए आप जैसे साहसी, पराक्रमी पुरूष का मैं बंदा हूं। भला मेरा कैसा साहस! म्ेरी मुक्ति होने में दो महीने शेष हैं। साहस तो आपका है कि ऐसे प्रसंग में भी आप इतने प्रसन्न हैं।’’

पत्र पहुंचा दिया

उसने जाकर विश्वासपूर्वक बाल को पत्र पहुंचाया। परंतु उसकी शूरता की व्याख्या मेरे ध्यान से नहीं उतरी। डाकू लोग चोरी को पाप और तुच्छ कर्म समझते हैं। मांग जाति के लोग डोमों को नहीं छूते! इसी तरह यह भी। दूसरे


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मैं शूर पुरूष हूं, और इसीलिए आप जैसे साहसी, पराक्रमी पुरूष का मैं बंदा हूं। भला मेरा कैसा साहस! म्ेरी मुक्ति होने में दो महीने शेष हैं। साहस तो आपका है कि ऐसे प्रसंग में भी आप इतने प्रसन्न हैं।’’

पत्र पहुंचा दिया

उसने जाकर विश्वासपूर्वक बाल को पत्र पहुंचाया। परंतु उसकी शूरता की व्याख्या मेरे ध्यान से नहीं उतरी। डाकू लोग चोरी को पाप और तुच्छ कर्म समझते हैं। मांग जाति के लोग डोमों को नहीं छूते! इसी तरह यह भी। दूसरे


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