बड़े-बडे़ नामवर लोगों ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए हमारे इस भोले शंकर को आगे करके सब्जबाग दिखाकर इन्हें मुंह के बल गिरा दिया। दादा, आपकी अपेक्षा मैं
कितना सुखी हूं। महीने-के-महीने वेतन पाता हूं, तिस पर पेंशन है ही। पचास-साठ रूपये खनखनाते हुए मजे में जीवनयापन कर रहा हूं। और आप- कुंदन जैसा दमकता रूप, खिलता यौवन, बालिस्टरी, दीवान की बेटी ब्याही हुई सर्वनाश किया आपने अपने जीवन का, स्वर्गीय सुख का । किसलिए? देश के लिए?
बड़े-बडे़ नामवर लोगों ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए हमारे इस भोले शंकर को आगे करके सब्जबाग दिखाकर इन्हें मुंह के बल गिरा दिया। दादा, आपकी अपेक्षा मैं
कितना सुखी हूं। महीने-के-महीने वेतन पाता हूं, तिस पर पेंशन है ही। पचास-साठ रूपये खनखनाते हुए मजे में जीवनयापन कर रहा हूं। और आप- कुंदन जैसा दमकता रूप, खिलता यौवन, बालिस्टरी, दीवान की बेटी ब्याही हुई सर्वनाश किया आपने अपने जीवन का, स्वर्गीय सुख का । किसलिए? देश के लिए?