के झुंड को अंदमान भेजने के लिए कुछ दिन तक रखा जाता है। उनके इस अगली यात्रा के लिए होने वाले आगमन को ही हम बंदियों की परिभाषा में ‘चालान’ कहा जाता है। नामी चोर, निर्दयी, खतरनाक डाकू, नृशंस हत्यारे, आग लगानेवाले, उग्र अपराधियों में भी भयानक समझे जानेवाले आदि तमाम
‘सज्जनों’ का समूह आज ठाणे के कारागार में पधार रहा था।
बंदीशाला में इस मेले के आने का दिवस बहुतों को एक उत्सव का दिन प्रतीत होता है; क्यांेकि प्रत्येक बंदी के प्राण इस उकताहट भरे,
के झुंड को अंदमान भेजने के लिए कुछ दिन तक रखा जाता है। उनके इस अगली यात्रा के लिए होने वाले आगमन को ही हम बंदियों की परिभाषा में ‘चालान’ कहा जाता है। नामी चोर, निर्दयी, खतरनाक डाकू, नृशंस हत्यारे, आग लगानेवाले, उग्र अपराधियों में भी भयानक समझे जानेवाले आदि तमाम
‘सज्जनों’ का समूह आज ठाणे के कारागार में पधार रहा था।
बंदीशाला में इस मेले के आने का दिवस बहुतों को एक उत्सव का दिन प्रतीत होता है; क्यांेकि प्रत्येक बंदी के प्राण इस उकताहट भरे,