नीरस जीवन के पंेच से, किसी भी बहाने से क्यों न हो, मुक्ति पाने के लिए घुल-घुलकर कांटा बनते हैं। चाहे किसी कौए का उड़ते-उड़ते एकाध पर गिर पड़े या एक चिड़िया को दूसरी चिड़िया मारने लगे- कोई भी नई, साधारण सी घटना एस उकताहट भरे जीवन में तनिक मनोंरजन का कारण बनती है, उसमें रंग भरती है और फिर आज तो ‘चालान’ के लिए पूर्ववर्ती परकोटे की एक भीत की ओट में स्वतंत्र कोठरियों का एक रिक्त हिस्सा आरक्षित था। एस दालान को झाड़-बुहारकर साफ करने में,
नीरस जीवन के पंेच से, किसी भी बहाने से क्यों न हो, मुक्ति पाने के लिए घुल-घुलकर कांटा बनते हैं। चाहे किसी कौए का उड़ते-उड़ते एकाध पर गिर पड़े या एक चिड़िया को दूसरी चिड़िया मारने लगे- कोई भी नई, साधारण सी घटना एस उकताहट भरे जीवन में तनिक मनोंरजन का कारण बनती है, उसमें रंग भरती है और फिर आज तो ‘चालान’ के लिए पूर्ववर्ती परकोटे की एक भीत की ओट में स्वतंत्र कोठरियों का एक रिक्त हिस्सा आरक्षित था। एस दालान को झाड़-बुहारकर साफ करने में,