राशन-पानी के नाप-तौल का प्रबंध करने में, कपड़ों की गिनती में तथा अन्य ढेर सारे प्रबंधों की उतावली में आधे से अधिक बंदी व्यस्त थे और शेष आधे बंदी उनकी उस धांधली तथा त्वरित निरीक्षण में अपनी उतावली में व्यस्त थे।
चालान आ गया
तीन बज रहे थे। प्रत्येक व्यक्ति अपने निकटवर्ती बंदी से आतुरता से पूछता, ‘‘अरे, अभी तक’ ‘चालान’ क्यों नहीं आया?’’ इतने में कारागार के द्वार से बंदियों में से कुछ लोग अचानक इधर-उधर मुड़ते हुए दिखाई देने लगे। ‘चालान’ आ गया’,
राशन-पानी के नाप-तौल का प्रबंध करने में, कपड़ों की गिनती में तथा अन्य ढेर सारे प्रबंधों की उतावली में आधे से अधिक बंदी व्यस्त थे और शेष आधे बंदी उनकी उस धांधली तथा त्वरित निरीक्षण में अपनी उतावली में व्यस्त थे।
चालान आ गया
तीन बज रहे थे। प्रत्येक व्यक्ति अपने निकटवर्ती बंदी से आतुरता से पूछता, ‘‘अरे, अभी तक’ ‘चालान’ क्यों नहीं आया?’’ इतने में कारागार के द्वार से बंदियों में से कुछ लोग अचानक इधर-उधर मुड़ते हुए दिखाई देने लगे। ‘चालान’ आ गया’,