जो जी में आए सो नाम लेकर गप्पें हांकता, और अपनी भोगेच्छार्थ उनके भोलेपन की बलि चढ़ाता।
बहन की हत्या
देखो, वह लड़का, अभी मूंछें भी नहीं भीगी, अठारह-उन्नीस की आयु! भंगेड़ियां की संगत में एक दिन भंग के नशे में अपनी बहन को इसलिए चाकू घोंप दिया कि उसने गाली दी। वह तो उसी समय ढेर हो गई और यह अब डरते, सहमते बिछौने के बोझ तले झुकती कमर के साथ तथा बेड़ियां उठाए न उठने के कारण लंगड़ाते-लंगड़ाते, घिसटता चल रहा है। इस भय से सहमा हुआ
जो जी में आए सो नाम लेकर गप्पें हांकता, और अपनी भोगेच्छार्थ उनके भोलेपन की बलि चढ़ाता।
बहन की हत्या
देखो, वह लड़का, अभी मूंछें भी नहीं भीगी, अठारह-उन्नीस की आयु! भंगेड़ियां की संगत में एक दिन भंग के नशे में अपनी बहन को इसलिए चाकू घोंप दिया कि उसने गाली दी। वह तो उसी समय ढेर हो गई और यह अब डरते, सहमते बिछौने के बोझ तले झुकती कमर के साथ तथा बेड़ियां उठाए न उठने के कारण लंगड़ाते-लंगड़ाते, घिसटता चल रहा है। इस भय से सहमा हुआ