मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

है कि एक बार कालेपानी गया तो अपना गांव और स्वजन फिर कब दिखेंगे। देखिए, इन दो सिरों के बीच में उग्रता, लज्जा,


निर्लज्जता तथा क्रूरता की विविध प्रतियां क्रमशः लगाई गई थी, जो इस घिनौने भोंडे जुलूस में बेड़िया खनकाती हुई जा रही थी।

बात-की-बात में वह जुलूस परकोटे के भीतर घुस गया। उनके निरीक्षणार्थ काराधिकारी चल पड़ा। यह समाचार मिलते ही प्रत्येक बंदी सिर पर पांव रखे दौड़ा और यथास्थान पहुंचकर काम का बहाना करने लगा। सब भोले


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है कि एक बार कालेपानी गया तो अपना गांव और स्वजन फिर कब दिखेंगे। देखिए, इन दो सिरों के बीच में उग्रता, लज्जा,


निर्लज्जता तथा क्रूरता की विविध प्रतियां क्रमशः लगाई गई थी, जो इस घिनौने भोंडे जुलूस में बेड़िया खनकाती हुई जा रही थी।

बात-की-बात में वह जुलूस परकोटे के भीतर घुस गया। उनके निरीक्षणार्थ काराधिकारी चल पड़ा। यह समाचार मिलते ही प्रत्येक बंदी सिर पर पांव रखे दौड़ा और यथास्थान पहुंचकर काम का बहाना करने लगा। सब भोले


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