बने हुए थे। सिपाही भी किसी के जरा सी ‘चूं’ करते ही बरस पड़ते, ‘ऐ क्या बात है, कायदे से चलो,‘ मानो इस बात से सर्वथा अनभिज्ञ थे कि एक क्षण पहले इधर कैसा घपला मचा था। अब तक बंदियों से अधिक सिपाहियों का जो भीड़-भड़क्का तथा ठेला- ठेली चल रही थी, वह सब जैसे ‘कायदे’ से या विधिवत् चल रही थी।
परोपकारी अधिकारी
दूसरे दिन यह निश्चित हुआ कि कालेपानी भेजने के लिए हमारा स्वास्थ्य, आयु आदि अनुकूल है या नहीं, इसकी वैद्यकीय जांच हो जाए। एक परोपकारी अधिकारी ने मुझसे कहा,
बने हुए थे। सिपाही भी किसी के जरा सी ‘चूं’ करते ही बरस पड़ते, ‘ऐ क्या बात है, कायदे से चलो,‘ मानो इस बात से सर्वथा अनभिज्ञ थे कि एक क्षण पहले इधर कैसा घपला मचा था। अब तक बंदियों से अधिक सिपाहियों का जो भीड़-भड़क्का तथा ठेला- ठेली चल रही थी, वह सब जैसे ‘कायदे’ से या विधिवत् चल रही थी।
परोपकारी अधिकारी
दूसरे दिन यह निश्चित हुआ कि कालेपानी भेजने के लिए हमारा स्वास्थ्य, आयु आदि अनुकूल है या नहीं, इसकी वैद्यकीय जांच हो जाए। एक परोपकारी अधिकारी ने मुझसे कहा,