की अति में हंसना ही हर तरह की हंसी में विकट होता है। दुःख का भार असहनीय होने अथवा निर्लज्जता के कंधे से उसे हलके से फेंक देने से दुःख भी खिलखिलाने लगता है। शोक भी उसी तरह हंसता है, जिस तरह हर्ष का अतिरेक होने पर वह रोता है। कहा जाता है कि फ्रांस की राज्यक्रांति के दौरान अमानष रक्तरंजन वध, हत्याओं, फांसी और मारकाट की पेरिस में अति हो गई थी, और ऐसी भीषण स्थिति हो गई थी कि आज प्रधानमंत्री बने और कल फांसी। उस समय जो नाट्यगृह कभी इतने नहीं भरते थे,
की अति में हंसना ही हर तरह की हंसी में विकट होता है। दुःख का भार असहनीय होने अथवा निर्लज्जता के कंधे से उसे हलके से फेंक देने से दुःख भी खिलखिलाने लगता है। शोक भी उसी तरह हंसता है, जिस तरह हर्ष का अतिरेक होने पर वह रोता है। कहा जाता है कि फ्रांस की राज्यक्रांति के दौरान अमानष रक्तरंजन वध, हत्याओं, फांसी और मारकाट की पेरिस में अति हो गई थी, और ऐसी भीषण स्थिति हो गई थी कि आज प्रधानमंत्री बने और कल फांसी। उस समय जो नाट्यगृह कभी इतने नहीं भरते थे,