और बंदियों में जो उस बीभत्स विनोद तथा निर्लज्ज व्यवहार का नंगा नृत्य कर रहे थे, वे कुछ अंशों में कर्तव्य भावना से उत्तोजित होकर ही ऐसा कर रहे थे। बीच में ही कोई निर्लज्ज शिरोमणि चीखता, ‘चालान का नाम राखियो, भाई! और फिर सीटियां तालियां, बेड़ियों की झनझनाहट की धमा-चैकड़ी शुरू। पूर्वापर चले आए इस चालान का ‘एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः। अघायुरिद्रिंयारामो मोघं पार्थ स जीवति।।’ इस तरह उदात्त बुद्वि से वे सारे लोग दस-बारह
और बंदियों में जो उस बीभत्स विनोद तथा निर्लज्ज व्यवहार का नंगा नृत्य कर रहे थे, वे कुछ अंशों में कर्तव्य भावना से उत्तोजित होकर ही ऐसा कर रहे थे। बीच में ही कोई निर्लज्ज शिरोमणि चीखता, ‘चालान का नाम राखियो, भाई! और फिर सीटियां तालियां, बेड़ियों की झनझनाहट की धमा-चैकड़ी शुरू। पूर्वापर चले आए इस चालान का ‘एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः। अघायुरिद्रिंयारामो मोघं पार्थ स जीवति।।’ इस तरह उदात्त बुद्वि से वे सारे लोग दस-बारह