मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

बजे तक उस नीच कर्तव्य को निभाने का प्रयास करते रहे। चालान के इस संस्थागत अभिमान के सामने क्या सिपाही, क्या सुपरिटेंडेंट सभी अपना सारा बड़प्पन ताक पर रखकर गुपचुप तमाकू लो, चिल्लाओ, बात करो, पर आपस में धीमी आवाज में और किसी प्रकार ठाणे के इस कारागृह से भाग न जाएं, यह सावधानी रखते हुए। पुलिस अफसरों को उतने ही बंदी गिन दिए, जितने लिए थे तब समझो गंगा नहा गए, और इस तरह नाक में दम होने पर निढाल हो जाते। कर्तव्य-कर्म वही है कि जिसकी प्रशंसा जिस समाज में हम रहते हैं,


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बजे तक उस नीच कर्तव्य को निभाने का प्रयास करते रहे। चालान के इस संस्थागत अभिमान के सामने क्या सिपाही, क्या सुपरिटेंडेंट सभी अपना सारा बड़प्पन ताक पर रखकर गुपचुप तमाकू लो, चिल्लाओ, बात करो, पर आपस में धीमी आवाज में और किसी प्रकार ठाणे के इस कारागृह से भाग न जाएं, यह सावधानी रखते हुए। पुलिस अफसरों को उतने ही बंदी गिन दिए, जितने लिए थे तब समझो गंगा नहा गए, और इस तरह नाक में दम होने पर निढाल हो जाते। कर्तव्य-कर्म वही है कि जिसकी प्रशंसा जिस समाज में हम रहते हैं,


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