उसका बहुजन समाज करता है। यह साधारण सहज भावना है। इस विधान का पोषक उदाहरण
इस चालान के संस्थागत अभिमान से कुछ परे ढूंढ़ना आवश्यक नहीं है। जिस समाज में बीभत्स विनोद कर्तव्य सिद्व होता है, उस समाज में वह व्यक्ति पापी तथा समाज-निंदित सिद्व होगा ही, जो इस तरह के विनोद में सम्मिलित नहीं होता। होली के त्योहार में जो गोबर से नहीं खेलता, वही अशिष्ट सिद्व होता है और समाज उसकी ओर उपहास तथा तिरस्कार बुद्वि से देखता है।
बालिस्टर की प्रतिष्ठा
उसका बहुजन समाज करता है। यह साधारण सहज भावना है। इस विधान का पोषक उदाहरण
इस चालान के संस्थागत अभिमान से कुछ परे ढूंढ़ना आवश्यक नहीं है। जिस समाज में बीभत्स विनोद कर्तव्य सिद्व होता है, उस समाज में वह व्यक्ति पापी तथा समाज-निंदित सिद्व होगा ही, जो इस तरह के विनोद में सम्मिलित नहीं होता। होली के त्योहार में जो गोबर से नहीं खेलता, वही अशिष्ट सिद्व होता है और समाज उसकी ओर उपहास तथा तिरस्कार बुद्वि से देखता है।
बालिस्टर की प्रतिष्ठा